शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

घटवर्णी !


घटवर्णी, घटवर्णी, घटवर्णी


घाट-घाट पर घटवर्णी


बाट-बाट पर घटवर्णी


ओजस्वी जुबान में


विद्रोही बयान में


न बात न विरोध


केवल मादक-मोहिनी


घटवर्णी,घटवर्णी,घटवर्णी


कभी हाथ जोड़े आते हैं


कभी बंदूक ताने आते हैं


कभी सेवा-सेवा जपते हैं


न्याय-न्याय भी रटते हैं


सत्ता -पैसा मिल जावे तो


गंगा भी वैतरणी


घटवर्णी,घटवर्णी,घटवर्णी

3 टिप्‍पणियां:

anand ने कहा…

हां ये नेता ऐसे ही होते है पि‍चर प्‍लांट जैसे।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मासा हारी भी होते हैं .... वैसे नेता तो मनुष्य हारी भी होते हैं ...

बेचैन आत्मा ने कहा…

घटवर्णी...!
.अच्छा व्यंग्य.