शनिवार, 24 अप्रैल 2010

कविता की जरूरत

जब

देश और दातुन का फर्क मालूम न चले

जीवन का मतलब दीमक हो जाये

और किसी पेड़ के नीचे

सायास पता लगे कि

बंदूक

, गोली, बारूद से ज्यादा डरपोक कुछ नहीं

तो

कविता मजबूरी हो जाती है

जब

हम नहीं कह पाये रस्सी को सांप

गांव की उस निर्दोष बेवा को बांझ

सुबह को सांझ और किनारे को मांझ

तो

कविता मजबूरी हो जाती है

जब

हर खबर पहले से सुनी हुई लगे

प्रेम और टेस्टासटेरॉन समानार्थी हो जाये

तो कविता मजबूरी हो जाती है

तो कविता ही एक जगह बचती है

कुछ कहने के लिए

कुछ सुनने के लिए

कुछ समझने के लिए

रोने

-गाने और चिल्लाने के लिए

मर जाने या मार देने के लिए

+

कविता मेरा भ्रम नहीं

कविता मेरा श्रम नहीं

लिखने के लिए भी नहीं

और छपने के लिए भी नहीं

++

कविता

काजल की कोठरी में बेदाग की तलाश है

निरर्थक शोर के बीच अर्थ का प्रयास है

खामोशी तोड़ने का आखिरी औजार है

मां की मनाही

और प्रेमिका की हां है

कविता

आखिरी सांस तक मानव बने रहने की जिद है

8 टिप्‍पणियां:

राकेश कौशिक ने कहा…

"जबहम नहीं कह पाये रस्सी को सांप
गांव की उस निर्दोष बेवा को बांझ
सुबह को सांझ और किनारे को मांझ
...
कविता काजल की कोठरी में बेदाग की तलाश है निरर्थक शोर के बीच अर्थ का प्रयास है खामोशी तोड़ने का आखिरी औजार है मां की मनाही और प्रेमिका की हां है कविता आखिरी सांस तक मानव बने रहने की जिद है"

बेबाक प्रस्तुति - लाजवाब रचना - यही सोच बनी रहे - हार्दिक शुभकामनाएं

मनोज कुमार ने कहा…

सीधे सीधे जीवन से जुड़ी ईस कविता में नैराश्य कहीं नहीं दीखता। एक अदम्य जिजीविषा का भाव कविता में इस भाव की अभिव्यक्ति हुई है।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत गहरा चिंतन ... बहुत कुछ खोजती, अपने आप को तलाशती ... अक्सर कविता ऐसे भी भटक जाती है सच और सच को कहने की ताक़त के बीच .... लाजवाब प्रस्तुति ...

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा!! अच्छी लगी रचना!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत सुन्दर दिल को छुं लेने वाली कविता है ! पढकर बहुत अच्छा लगा !
जब हर खबर पहले से सुनी हुई लगे
प्रेम और टेस्टोरेन समानार्थी हो जाये
तो कविता मजबूरी हो जाती है

क्या बात है जी !

रंजीत ने कहा…

चेतनासंपन्न मूल्यांकन के लिए आप सभी गुणी जनों का बहुत-बहुत आभार।

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

कविता

काजल की कोठरी में बेदाग की तलाश है

निरर्थक शोर के बीच अर्थ का प्रयास है

खामोशी तोड़ने का आखिरी औजार है

लाजवाब ....!!

जय श्रीवास्तव ने कहा…

i like your attitude. you always give material to be a resposible citizen.you are my asset.