सोमवार, 11 मार्च 2013

दूसरी पीढ़ी भी जवान होगी


एक पीढ़ी तैयार होगी
लूटे हुए पैसों के पालने में झूलती हुई
घोटाले के उड़नखटोले में उड़ती हुई
बेईमानी की छत के नीचे  सोती हुई
हर फिक्र को हवा में उ़डाती हुई 

पीढ़ी जवान होगी
शायद अनजान ही रहेगी इतिहास से
 

उसी समय एक दूसरी पीढ़ी भी रहेगी
लूटे हुए खेतों में रोती हुई
छीने हुए घरों को तलाशती हुई
उड़ते उड़नखटोले को निहारती हुई
पेट की भूख को दिमाग में महसूसती हुई
यह पीढ़ी भी जवान जरूर होगी
और इतिहास का निशान इसके ललाट पर होगा

जो कहते हैं कहें
मैं कैसे कह दूं, साथी
सब कुछ अच्छा होगा

7 टिप्‍पणियां:

Vikesh Badola ने कहा…

अमीरी-गरीबी का सुन्‍दर शब्‍द-चित्रण।

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

Sunil Kumar ने कहा…

सही कहा आपने ,बहुत सुंदर बधाई

Kalipad "Prasad" ने कहा…

पीदियों का अंतर हमेशा रही है ,रहेगा ,,आप भी मेरे ब्लोग्स का अनुशरण करें ,ख़ुशी होगी.
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Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत सुंदर .बेह्तरीन अभिव्यक्ति !शुभकामनायें.

रंजीत/ Ranjit ने कहा…

aap sabhon ka babhu-bahut aabhar,
Ranjit

राजन अग्रवाल ने कहा…

साथी सब कुछ अच्छा ही होगा.

रचना अच्छी है, लेकिन खुद पर लागू मत करना... सब कुछ अच्छा ही होगा...