गुरुवार, 12 जुलाई 2012

सूअर बनकर खुश हूं, मत मारो (एक लघु कथा)

उस व्यक्ति को अचानक अपने अगले जन्म का दिवज्ञान हुआ। जब वह बूढ़ा हो चला और मौत की घड़ी नजदीक आयी, तो वह अचानक बहुत परेशान हो उठा। जोर-जोर से विलाप करने लगा। पिता को तड़पते देख बेटों को चिंता हुई। वे अस्पताल जाने की  तैयारी करने लगे। लेकिन बूढ़े ने मना कर दिया। बोला, मुझे कोई कष्ट नहीं है। बेटों ने पूछा, तो आप तड़प क्यों रहे हैं पिता जी ? तब बूढ़े ने पूरी कहानी विस्तार से सुनाई। कहा, बेटा मैं किसी व्याधि के दर्द से नहीं रो रहा हूं, बल्कि अगले जन्म की तस्वीर देख कर मुझे मरने की इच्छा नहीं होती। बेटों ने पूछा, अगले जन्म की ऐसी कौन बात है कि उसे लेकर आप अभी से खौफ खा रहे हैं ? बूढ़े ने कहा, बेटे, मैं देख रहा हूं कि मेरा अगला जन्म एक सूअर के वंश में होगा। मैं सूअर बनकर धरती पर आना नहीं चाहता, लेकिन इसे टाल भी नहीं सकता। पिता की बात सुन सभी बेटे गहरी चिंता में डूब गये। लंबे समय तक खामोशी पसरी रही। तब बूढ़े ने कहा, मैंने उपाय खोज लिया है। मैं तुम लोगों को उस सूअर मालिक का नाम और पता बताता हूं, जिसकी पालतू सूअरनी की  कोख से ठीक साल भर बाद आज के ही दिन मेरा जन्म होगा। तुम लोग कुछ समय बाद  वहां पहुंच जाना और सूअरपालक से मुझे खरीदकर मार डालना। बेटे ने कहा, आप चिंता नहीं करें पिताजी, हम ऐसा ही करेंगे।
कुछ दिन बाद बूढ़े ने प्राण त्याग दिये। जल्द ही वह दिन भी आ गया। गांव से दस मील दूर एक सूअरपालक के यहां बूढ़े का पुनर्जन्म हुआ। ठीक एक महीने बाद तीनों बेटे सूअरपालक के पास पहुंचे। पूछा कि कुछ दिन पहले आपकी सूअरनी ने जो बच्चा जना है, वह मुझे दे दीजिए। बदले में आप जो राशि चाहें, मांग ले। सूअरपालक खुश हुआ और उसने मुंहमांगी कीमत पर सूअर के बच्चे बेच दिये। जैसे ही सूअर के बच्चे को लेकर वे लोग एक सुनसान जगह पर पहुंचे और उसे मारने की कोशिश की, सूअर का बच्चा जोर-जोर से रोने लगा। प्राण बख्शने की गुहार करने लगा। बेटे को अचरज हुआ, कहा- आपने ही तो कहा था पिता जी कि मुझे मार देना। सूअर ने जवाब दिया- मैं गलत था। अब मेरा मन इस जीवन में ही रम गया है। मुझे साथी सूअरों के साथ गंदे कीचड़ों में नहाना, मल खाना, गंदगी में घूमना अच्छा लगने लगा है। मुझे बख्श दो, मैं मरना नहीं चाहता !!! तीनों बेटे ने सिर पीट लिया और वापस लौट गये।

9 टिप्‍पणियां:

Pallavi saxena ने कहा…

:-)जिसको जो जीवन मिलता है वो उसी में रम जाता है अपनी जान सभी को प्यारी होती है फिर चाहे जन्म किसी भी जीव में क्यूँ न हुआ हो।

संगीता पुरी ने कहा…

सही बात !!

विनोद सैनी ने कहा…

शान्‍दार प्रस्तुि‍त
यनिक तकनीकी ब्‍लाग--------- फेसबुक टाईम लाईन अपनाये

विनोद सैनी ने कहा…

शान्‍दार प्रस्तुि‍त
यनिक तकनीकी ब्‍लाग--------- फेसबुक टाईम लाईन अपनाये

विनोद सैनी ने कहा…

शानदार प्रस्‍तुति
यूनिक तकनीकी ब्‍लाग------------- फेसबुक टाईमलाईन आपनाये

रंजीत/ Ranjit ने कहा…

aap sabon ka aabhar

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (14-07-2012) के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
शिष्ट आचरण से सदा, अंकित करना भाव।।

रंजीत/ Ranjit ने कहा…

DHANYAWAD MAYANK JEE....

lokendra singh rajput ने कहा…

हा हा हा....
मोह माया में फंसा है जीव...