मंगलवार, 3 जुलाई 2012

दर्द का अपरूप : एक कोशी, एक बह्मपुत्र

ब्रह्मपुत्र की पीड़ा कोशी ही समझ सकती है। दोनों नदियां धारा बदलती हैं। दोनों अब बाढ़ नहीं, सुनामी लाती हैं। दोनों ही दोषपूर्ण अभियंत्रण का शिकार है। इन दिनों ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों से असम में जो बाढ़ आयी हुई है, उसने नौ लाख से ज्यादा लोगों को बेघर कर दिया है। ये तस्वीरें मुझे 2008 की कुसहा त्रासदी की याद दिला गयीं। इसलिए यहां सबके साथ शेयर कर रहा हूं। कहते हैं कि बांटने से दर्द कम हो जाता है...

3 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति ।।



इस प्रविष्टी की चर्चा बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी !

सूचनार्थ!

वाणी गीत ने कहा…

कहीं पीने को पानी नहीं कही डूबने की तैयारी है ...प्रकृति की लीला न्यारी है !

रंजीत/ Ranjit ने कहा…

is post ko Charcha manch me shamil karne ke liye bahut-bahut aabhar Ravikar jee.
ranjit