शनिवार, 4 अप्रैल 2009

जो पुल बनाएंगे

अज्ञेय

जो पुल बनाएंगे
वे अनिवार्यत:पीछे रह जाएंगे।

सेनाएँ हो जाएंगी पार
मारे जाएंगे रावण
जयी होंगे राम,
जो निर्माता रहे
इतिहास में बन्दर कहलाएंगे

8 टिप्‍पणियां:

Mired Mirage ने कहा…

वाह रंजीत जी, आपक इस कविता की जितनी भी दाद दी जाए कम है। ये पंक्तियाँ भारतीय मुख्य राजनैतिक दलों के लिए काम करने वालों को तब तब याद करनी चाहिए जब बन्दर सेवा करते रह जाते हैं और फिल्मी, क्रिकेटी, लोग आज दल में सम्मिलित होते हैं और आज ही दल के नेता बन जाते हैं।
घुघूती बासूती

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया सटीक रचना रंजीत जी. धन्यवाद.

Udan Tashtari ने कहा…

निर्माता का तो यही हश्र होना है हमेशा.

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत खूब ...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मारे जाएंगे रावण
जयी होंगे राम,
सुन्दर लिखा है..........
समय तो सही बतलाता है की राम सदा ही विजय होंगे

रंजीत ने कहा…

bhai, yeh meri rachna nahin, balkee hindi sahitya ke shikhar purush Sachidanand Hiranand vatsyayan Ajneya jee kee hai. dhanyawad ke patra wahi hain. Mujhe laga kee vartmaan daur me yeh kavita kafee prasangik hai isliye aap logon ke samne Rakh diya.upar me ajneya jee kaa nam hai, fir bhee...
Dhanyawad
Ranjit

ZEHAR ने कहा…

vaaki dilchasp hai.

sourabh.from iimc new delhi
prabhat freind

रंजीत ने कहा…

Saurabh saheb, bahut-bahut shukriya, 'do patan ke bich' me fasne ke liye.
Ranjit