बुधवार, 15 अप्रैल 2009

इन तस्वीरों में देखिये भारत - नेपाल की सीमा

प्राचीन काल से ही भारत व नेपाल के लोगों के मध्य साझे के चूल्हे जलते रहे हैं। दोनों ओर के लोगों के बीच लंबे समय से सामाजिक, वैवाहिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक और भाषिक संबंध चलते आ रहे हैं। इसकी शुरुआत नेपाल के एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभरने और दोनों देशों के बीच वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा के निर्धारण से पहले हो चुकी थी। इन दिनों नेपाल राजनीतिक बदलाव के क्रम से गुजर रहा है। राजतंत्र का खात्मा हो चुका है, लेकि सीमाई नेपाली लोगों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। यहां मैं भारत-नेपाल के सरहदी इलाकों की चंद तस्वीर पेश कर रहा हूं, ताकि आप भी दुनिया के इस अनोखे बोर्डर के आसपास बसे लोगों के जीवन-स्पंदन को महसूस कर सकें और इस बोर्डर की विशेषताओं और अभिशापों को समझ सकें।
(सीमाई नेपाली सहर विराटनगर में भ्रतिदुतिया पर्व के अवसर पर पूजा करने जाती बहने )
( सीमाई इलाके में आज भी तंत्र -मंत्र और तांत्रिकों का है बोलबाला )

(कुशहा हादसा के वाद बाढ़ की चपेट में आया प्रसिद्ध कोशी वन्य अभ्यारण्य जिसमे लोगों के साथ -साथ जंगली जानवर भी मारे गए )
( बिहार के सुपौल जिले स्थित एक सरहदी गाँव और बिहार के स्कूल से नेपाल लौटते बच्चे एवं खेत की तरफ़ जाती महिला किसान )
(सीमाई इलाकों में आज भी खूब चलती है भैसा गाडी )
(पूवी नेपाल के काकरभित्ता शहर और पश्चिम बंगाल के पानीटंकी शहर को जोड़ती प्रसिद्ध मेची पुल )


(बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित महिअर्वा-संतगंज बोर्डर पर भारतीय सीमा से घास काटकर अपने गांव की ओर जाती नेपाली कृषकों की बेटियाँ और उसके निचे बॉस का बॉर्डर पोस्ट , यह बांस हमेशा उठा ही रहता है )

(पूर्वी चंपारण स्थित रक्सौल जंक्सनः बड़ी संख्या में नेपाली लोग हर दिन इस शहर से भारतीय शहरों के लिए गाड़ी पकड़ते हैं)
(रक्सौल-बीरगंज का सीमाई चेक पोस्ट, तस्करी और माल ढुलाई के लिए विख्यात मार्ग )

( पूर्वी बिहार स्थित सीमाई रेलवे स्टेशन जोगबनी,ब्राड गेज के निर्माण के बाद यह नेपाल के लिए आयात-द्वार का काम कर रहा है, यहां से विराटनगर काफी नजदीक है)

(बिहार के सुपौल जिले के सीमाई शहर बीरपुर में सांप नचाता एक नेपाली संपेराः नेपाल की एक जनजाति के लोग के लिए आज भी सांप ही आजिविका का एकमात्र स्रोत है, हर दिन ये सीमाई शहरों-गांवों में अपने खेल दिखाने आते हैं )
(नजर के सामने तस्करीः बिहार के अररिया जिले के एक गांव से भारतीय जवानों को रिश्वत देकर तस्करी का समान ले जाता एक तस्कर, फसल कटने और बोने के समय यह दृश्य आम होता है )
(सुगौली का प्रसिद्व भारत-नेपाल प्रवेश मार्ग )
(किशनगंज स्थित एक चौकी)



(अंतरराष्ट्रीय सीमा का एहसास कराता एक सीतामढ़ी जिले स्थित एक पीलर, इसे गड़े पांच दशक हो गये और क्षेत्र के कई पीलर उखड़ चुके हैं, इसलिए अक्सर दोनों देशों के किसानों में खेत की सीमा को लेकर विवाद होते रहता है )
(आइएसआइ की बढ़ती गतिविधियों के बाद भारत ने कुछ पोस्टों पर अर्द्धसैनिक बल तो तैनात कर दिया, लेकिन आम नागरिकों को तंग करने के सिवा अन्य उपलब्धि हासिल करने में नाकाम ही हैं )

















1 टिप्पणी:

गिरीन्द्र नाथ झा ने कहा…

बॉस पुरानी यादें ताजा करा दी। नेपाल सीमा से सटे रहने का अनुभव है तो ये तस्वीरें भावुक तो कर ही देगी न।

शुक्रिया